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गुरुवार, 10 नवंबर 2011

हल्का हल्का....


हल्की सी मुस्कराहट,
हल्का हल्का सा नशा,
हल्की सी जुल्फों की बदरी ,
हल्का हल्का सा कहकशा ,
हल्की सी ख़ामोशी तेरी ,
हल्का सा मेरा बहक जाना,
हल्का सा नज़र का झुकना,
हल्का सा शर्मा जाना,
हल्का सा चुपके से तकना,
हल्का से नज़रें चुराना,
सबकुछ हल्का सा जानना,
हल्का सा अंजान हो जाना,
हल्की सी हकीक़त ,
हल्का सा कोई अफसाना,
हल्का सा ख्वाब का बुनना ,
हल्का सा सच हो जाना,
हल्की सी सवालों की शिकान,
हल्का सा हल का खो जाना ,
हल्की हल्की तेरी अदाओं से,
हलक पे मेरे बन जाना ,
हल्की हल्की सी दिल्लगी ये,
हल्का सा कोई रोग पुराना ...........

रविवार, 28 फ़रवरी 2010

मुस्कान

तुम्हारे ही 
सुर्ख लाल होठों पर 
वह मुस्कान खिली थी 
जिस ने अनजाने में ही शायद 
हमारे अटूट रिश्ते की 
नीव रख डाली थी 
उस दिन 
सारी सृष्टि संग तुम्हारे 
मुस्कुराई थी 
सूने चमन में जैसे 
बहार फिर लौट आई थी 
आज 
आज एक बार फिर 
तुम मुस्कुरा दो
मेरे हृदय में 
प्रेम रुपी नव पुष्प 
खिला दो 
आज एक बार फिर 
तुम मुस्कुरा दो ...