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गुरुवार, 19 सितंबर 2013

आरना के पहले जन्मदिन पर




साढ़े आठ मोती जब
तेरी हँसी से झाँकते है 
सवेरा घुटनों पे चल के
मेरी गोद में आता है ।

रब्ब और क़रीब लगता है
उसकी आरती जब लोरी बन
तेरी नींदों के कैनवस पर
ख़्वाबों को बुनती है

"माँ करें दिन रात सेवा,
पर बाप-बेटी आपस में चमचे हैं"
'उजा' की झूठी जलन के ताने
अब गीतों से लगते हैं
माँ की ममता के अफ़साने 
जबसे जगरातों में देखें हैं ।

राक्षस की जान नन्हे से तोते में
ऐसी कहानियों पे यक़ीं नहीं था मुझको
पर जब से तू आई है 'आरना'
'इजे' को कहानी का यक़ीं आ गया है ।

हसीं तेरी जब रूह का शर्बत बनती है
डबडबाई आँखे जब कलेजे को छनती है
राक्षस की जान नन्हे से तोते में
ख़ुद-ब्-खुद यक़ीं आ जाता है
सवेरा  आजकल ख़ुद घुटनों पे 
चल के मेरी गोद में आता है ।

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

बारीशों में नंगे सिर




बारीशों में नंगे सिर,
कभी चल के देखा है,
बूँदें लपक के,
चूमने को आती हैं,
गाड़ी के शीशे,
नीचे कर के देखो
हवा कुछ और ही,
गीत सुनाती है
बस बिन कुछ कहे,
यूँही मुस्कुरा के देखो,
अंजाने खुद-ब-खुद
अपने से लगते हैं
अपने ही डर की दीवारों 
में जो क़ैद हैं हम 
इक ईंट गिरा के देखो
दुनिया कुछ हॅसीन लगती है…


शुक्रवार, 10 मई 2013

यादों की चादर





महफ़िलो के करघों पर, 
जब दोस्तों की बातें 
उलझते, सुलझते फिर उलझते,
दिलकश दास्ताँ 
बन उभरती है 
दिल में यादों की चादर
थोड़ी और लम्बी
 थोड़ी और रंगी 
हो जाती है !

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

अंतर्द्वंद



कौन रौंद रहा है तुम्हें ?
और कौन है जो मुझे 
पल पल पीस रहा है ?
सोचा वक़्त को इलज़ाम दूँ ,
किस्मत को बुरा भला कहूँ,
रब को भी कोसना चाहा कभी ,
ज़िन्दगी पे लान्नत फेकी ।
पर द्वंद तो कहीं और है ,
शायद तेरे मेरे भीतर कहीं ,
तो  गैरों पे क्या उंगली उठायें ?
क्यों न पहले खुद को 
खुद ही से बचायें ?


शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

July Seattle





















I sit here in july seattle,
waiting for the rain to stop,
and I think of you my heart,
how I wish I could fly.
And you enjoy the Vegas summer
chasing the dream mirage
others sit in the same room
pretending to be present here
when they are actually wandering
on their own disillusioned paths.........